जैव विविधता (Biodiversity)
×वर्ष 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में जैव विविधता की मानक परिभाषा अपनाई गई। इस परिभाषा के अनुसार, "जैव विविधता समस्त स्रोतों यथा-अंतक्षेत्रीय, स्थलीय, सागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थतिक तंत्रों के जीवों के मध्य अंतर और साथ ही उन सभी पारिस्थितिक समूह, जिनके ये भाग हैं, में पाई जाने वाली विविधताएँ हैं। इसमें एक प्रजाति के अंदर पाई जाने वाली विविधता, विभिन्न जातियों के मध्य विविधता तथा पारिस्थितिकीय विविधता सम्मिलित है।"
जैव विविधता का महत्त्व
×पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव-जंतुओं में उनके आवास और गुणों के आधार पर अत्यधिक भिन्नता पाई जाती है जो मनुष्यों के लिये अपना अस्तित्व बनाए रखने में अत्यधिक सहायक।
×जैव विविधता से मनुष्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त करता है।
×मनुष्य को जीव-जंतुओं, वनस्पतियों से भोजन, आवास के लिये ज़रूरी संसाधन, कपड़े, औषधियाँ, रबर, इमारती लकड़ी आदि की प्राप्ति के साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के लिये आवश्यक संसाधनों की भी प्राप्ति होती है।
×जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन का आधार है। जैव विविधता में समृद्धि पारितंत्र को स्वस्थ एवं संतुलित बनाए रखने में सहायक है।

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